Thursday, October 29, 2009

Mohabbat Ek Ruhani Silsila

दुन्या का चाहे कोई भी इल्म हो उसे पाने के लिए तालीम की ज़रूरत होती हें जिसमें ज़िन्दगी के जाने कितने खुबसूरत लम्हे गुज़र जाते हें सिर्फ़ एक निशाने को लेकर जाने कितने निशान छोड़ दिए जाते हें सिर्फ़ एक रस्ते को लिए कई सरे रस्ते बंद कर दिए जाते हें बहुत सरे मंसूबो को थाप्किया देकर सुला दिया जाता हें या फिर बहेरहेमीसे दबा दिया जाता हें तब कही जाकर ये इल्म की बुलंद ईमारत सजती हें और अगर अकलमंदी से काम लिया गया तो निश्चित तोर पर इल्म में जुल्म की सीना जीरी धीरे धीरे पैर ज़माने लगती हे तो फिर इल्म को इल्म नही बल्कि जुल्म करार देना ही ज्यादा बहेतर हे।
खेर ये तो इल्म की बात हें जिसमे जाने कितना वक़्त गुजर जाता हें और उसे पाने के लिए तालीम की खास जरुरत होती हें हा मगर इल्म को छोड़ कर जिंदगी का एक एसा भी मोड़ हें जहा किसी को भी इल्म और तालीम कीकोई जरुरत नही होती और वोह अपने आप में तालीम हें और रूहानी जज़्बांह हेंजिस किसी के खुबसूरत चमन में फुल खिल जाया करते चाहे वेरन ही क्यों होवेरन में भी तो उन्हें सींच ने को तो बारिश की फुहार चाहिए तो शर्दबहार।
वोह एक एसा जज़्बह हे जिसे सीख ने के लिए किसी की जरुरत नही क्यों की वोह एक बहजुबान सिलसिला हे जोएक दिल से तूफान बनकर दुसरे के दिल में अरमान बनकर समा जाता हे| वोह अरमान मुहब्बत का अरमान हेजिस के फुल तो बसी होते हे ही कभी उदास होते हे वोह सारी रात खिले रहेते हे और सारा दिन खिल करमोहब्बत की ताजगी बरकार रख ते हे
मोहब्बत ज़िन्दगी की एक इसी चीज़ हे जिस में वोह खुबसूरत गुलाब हे जो हर दिल अज़ीज़ के दायरे में खिल जायाकरता हे उसे जित ने के लिए एक एसी जंग की ज़रूरत होती हे जिसमे तीरंदाजी सिर्फ़ दो दिलो में होती हें इस ज़ंगमें कोई रेफरी की ज़रूरत नही होती यह एक इसी ज़ंग हे जिसमे मुहब्बत के नाम पर लड़ने वाले कभी नही थकतेयह ज़ंग कभी बचपन से शुरू होकर ज़िन्दगी के आखरी दम तक जारी रहेती हे तो कभी जवानी से शरु होंकर जवानी को पानी पीला देती हे कभी कभी तो बुढापे में शरु होकर उसे जवान बना देती हे यह मुहब्बत ही हे जिसमे कभी ज़ंग ख़त्म नही होती यह अपने आप में एक बेनजीर अदा हे जो अपने आप पैदा होती हे कभी निगाहों से तो कभी दिल के किसी कोनेसे एक नाज़ुक सा रुजान सा उठता हे और मन की उड़न पर सवार होकर फिजाओं मेंसरज़मी के सिने पर और नीले गगन के चाँद सितारों पर मुहब्बत की इबादत टंक दिया करता हें जिस के सजदे में दो दिल जुक जाया करते हें!
मुहब्बत की एक खास बात ये हे के वोह फरयादी हे तो ज़िन्दगी की बरबादी भी हे फिर भी लोग मुहब्बत से दिल लगाया करते ही नही बल्कि दिल दे डाल ते हें वेसे तो मुहब्बत से किसी को परहेज़ नही मगर कुछ लोग एसे भी हे जो मुहब्बत से या तो नफरत करते हे या नाक सिकोड़ लेते हे मगर उनके दिल की धडकनों से कोई पूछे के उनका दिल क्यों धड़कता हे उस धड़कन में कोई सूरत तो धड़कती नही ? ..... इस दुन्या में भला कोन एसा होगा जिस का दिल ही नही धड़कता ? जनाब पत्थरों के भी दिल धड़कते हे इसी लिए लोग पत्थरो से भी दिल ही नही लगा ते बल्कि पत्थरो को दिल दे डालते हे!.. दिल लगते आमिर - गरीब को भी देखा हे तो संत - फ़कीर को भी किसी से दिल लगते हुवे देखा हें मुहब्बत के नाम पर जाने कितने कुर्बान हो गए मगर उनकी मुहब्बत नीलाम ना हो सकी कुष्ण की मुहब्बत में मीरा की नाचते सब ने देखा तो उसे मुहब्बत के नाम पर ज़हर पीते हुवे भी लोगो ने देखा दुन्यामें मुहब्बत में ना जाने कितने आशिक कुर्बान हो कर जिंदाबाद हो गए और नजाने कितने जवान बेताज बादशाह बन गए यह नशा कोई अफीन या दारू का नशा नही यह नशा ज़िन्दगी का नक्शा ही बदल देता हें और मुहब्बत कोई नाफ्शानी खुवाइश नही बल्कि एक रूहानी जज्बांह हें

अबरार शेख

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